आगरा में एफएसडीए टीम की छापेमारी में चाैंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बाजार में नकली इंसुलिन के इंजेक्शन बेचे जा रहे थे। 21 मई युग फार्मा में इंसुलिन के इंजेक्शन पर री-लेबलिंग की गई थी। ये इंजेक्शन शारदा फार्मा से बिना बिल के खरीदे। इसके संचालक शिवम गुप्ता ने ये इंजेक्शन आरएमडी फार्मा के संचालक राजेश गुप्ता से लिए थे। शारदा फार्मा के सीसीटीवी फुटेज देखने पर छापे की भनक लगते ही प्रोपराइटर का भाई और उसके कर्मचारी भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं लेकर पिछले दरवाजे से भाग गए। इनको एसटीएफ ने गाजियाबाद में पकड़ा है। इन्होंने बताया कि सरकारी अस्पताल से चोरी की दवाएं मोहित गुप्ता, महादेव गुप्ता से बिना बिल के सस्ते दामों पर अवैध रूप से खरीदते थे। इन पर केमिकल से नॉट फॉर सेल मिटाकर मनमानी एमआरपी अंकित कर बाजार में बिना बिल के बेचते थे। वीए मेडिकोज की जांच में नामी कंपनियों की जार्डियंस, ग्लूकोनॉर्म पीजी (मधुमेह), टेल्मा (हाइपरटेंशन) और थायरॉक्स (हार्मोन्स) की दवाओं का भंडारण मिला। संचालक शोभित अग्रवाल बिल प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में इन दवाओं के रीलेबलिंग की गई। सुरक्षा जांच में टेल्मा यूवी लाइट रिफ्लेक्ट नहीं हुई। इससे ये नकली की पुष्टि हुई। शोभित अग्रवाल ने वीए मेडिकोज से दवाएं हर्षित ट्रेडर्स ने बिना बिल के दी थीं, जबकि नकली दवाओं के चलते 16 जून को हर्षित ट्रेडर्स का लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इस तरह पुराने बिलों का अवैध इस्तेमाल कर 1.80 लाख रुपये की दवाओं की कागजी बिलिंग की। उसने पूर्व में विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव गुप्ता से बिना बिल के नकली चाइमोरल फोर्टे दवाएं कम दाम में खरीदी थी। कानूनी जांच से बचने के लिए अपने लैपटॉप को ट्रक के नीचे रखकर नष्ट कर दिया। रुद्रा एंटरप्राइजेज के मोहित बंसल और श्री भगवती मेडिकल एजेंसी मथुरा की आपसी मिलीभगत कर एक-दो मई को फर्जी बिल काटे, जबकि उस पते पर मथुरा की फर्म को लाइसेंस 20 मई को जारी किया था। इन सभी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है।