आगरा। कुत्ता-बिल्ली पालने, कारपेट बिछाने का शौक बच्चाें को बीमार बना रहा है। इससे एलर्जी हो रही है। इलाज नहीं होने पर बच्चे अस्थमा से पीड़ित हो रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में आने वाले बच्चों में 8.2 फीसदी बच्चों में अस्थमा मिल रहा है। इसमें 40 फीसदी की वजह घर का प्रदूषण बन रहा है। एसएन के बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. राजेश्वर दयाल ने बताया कि ओपीडी में 8.2 फीसदी बच्चे अस्थमा के आते हैं। इनमें से 60 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जिनके माता-पिता या खून के रिश्तों में किसी को ये बीमारी है। 40 फीसदी की वजह धूल, धुआं और पालतू जानवर हैं। ऐसे घरों के बच्चों की संख्या अधिक है, जहां कारपेट, चादर, पर्दे का उपयोग अधिक है और घर में पालतू जानवर भी हैं। चादर, पर्दे और कारपेट में धूल की अतिसूक्ष्म कण (डस्ट माइट) से एलर्जी होती है। कुत्ता, बिल्ली, खरगोश समेत अन्य पालतू जानवरों के बाल और रूसी से एलर्जी बनती है। इसका स्तर बढ़ने पर ये अस्थमा बन जाता है।