आगरा के एत्मादपुर थाने में महिला दरोगा के वायरल ऑडियो को पुलिस आयुक्त ने गंभीरता से लिया है। वायरल ऑडियो में महिला दरोगा अपने इंस्पेक्टर, मुंशी पर रुपये लेकर नाम निकालने की बात कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये आरोप गलत हैं। महिला दरोगा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इसकी जांच अपर पुलिस आयुक्त को साैंपी गई है। महिला दरोगा को लाइन हाजिर किया जा चुका है। थाना ट्रांस यमुना के कालिंदी विहार क्षेत्र की महिला फिरोजाबाद के एक कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने 25 अक्तूबर को थाना एत्मादपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि 17 अक्तूबर को मायके से लौट रही थी। एत्मादपुर निवासी सगे भाई आशुतोष, हिमांशु ने साथी अनूप और रितेश के साथ कार में उसे जबरन बैठा लिया। दुष्कर्म की कोशिश की, कपड़े फाड़ दिए। अश्लील हरकत की। तभी पुलिस की गाड़ी आने पर आरोपी भाग गए। 30 सितंबर को भी आरोपियों ने रास्ते में अश्लील हरकत की थी। दूसरी घटना के आठ दिन बाद पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की। मामले में आशुतोष, हिमांशु, अनूप, रितेश, दो अन्य अक्षय और सुमित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। घटना की विवेचना एसआई नीतू कर रही थीं। केस में 16 दिसंबर आरोप पत्र लगाया गया था। पुलिस के अनुसार विवेचक महिला दरोगा नीतू शर्मा द्वारा यह कहना कि उनके संज्ञान के बिना चार्जशीट दाखिल की गई, ये तथ्यात्मक रूप से असत्य है। अब तक की जांच में विवेचक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विवेचक व पीड़िता के वायरल ऑडियो व विवेचक द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हेतु अपर पुलिस आयुक्त को जांच सौंपी गई है। जांच में विवेचक द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले समस्त साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। पीड़िता अपनी पूर्व विवेचना से संतुष्ट नहीं थीं। विवेचना क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित करते हुए क्राइम ब्रान्च की महिला उपनिरीक्षक को सौंपी गई है।