नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजकर साइबर स्लेवरी में फंसाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड मर्चेंट नेवी के पूर्व कैप्टन नागेश कुमार को थाना साइबर क्राइम पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। उसे पुलिस टीम चंडीगढ़ से पकड़कर ट्रांजिट रिमांड पर आगरा लाई। आरोपी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा का रहने वाला है। शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पूर्व में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उसका नाम सामने आया था। पुलिस 6 महीने से धरपकड़ के लिए जाल बिछाए हुए थी। आगरा, कानपुर सहित देशभर के युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर स्लेवरी में फंसाने का मामला सितंबर 2025 में सामने आया था। आगरा के भी युवाओं से लाखों की धोखाधड़ी की गई थी। युवकों को पहले थाईलैंड भेजा जाता था। एजेंट बॉर्डर पार कर कंबोडिया और लाओस ले जाते थे। यहां पर चाइनीज कंपनियों को बेच दिया जाता था। गिरोह के एजेंट भारत के साथ ही अन्य देशों में फैले हुए थे। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि मई, हाथरस निवासी सौरभ और अभिज्ञान ने शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें विदेश में अच्छे पैकेज पर नौकरी की बात कही गई। 3.5-3.5 लाख रुपये लेने के बाद बैंकॉक के रास्ते कंबोडिया भेज दिया। यहां एक कंपनी में कॉलिंग की नौकरी दे दी गई। बाद में पता चला कि कंपनी के लोग साइबर ठगी करते हैं। इसके बदले में कमीशन मिलता है। वह किसी तरह वापस आए थे। पुलिस ने मामले की जांच की। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद तीन आरोपियों अजय शुक्ला, रौनी उर्फ आतिफ खान और आमिर खान को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में पता चला कि भोले भाले लोगों को नौकरी का झांसा देकर फंसाते थे। चाइनीज कंपनियों को बेच देते थे। बदले में उन्हें कमीशन मिलता था। पूर्व में कई लोगों को कंबोडिया भेजकर साइबर स्लेवरी का काम किया था। गैंग का सरगना चंडीगढ़ का नागेश उर्फ कैप्टन चौहान है। वह भारत और विदेशी एजेंट के संपर्क में रहता है। कंपनियों से भी पैसा लेता है।