आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली बार हार्ट बाईपास सर्जरी हुई है। मरीज की दो नस बंद थी और एक ही से हृदय धड़क रहा था। सीने-पैरों की नस लगाकर मरीज की जान बचाई है। ऑपरेशन तीन घंटे तक चला। रिकार्ड 72 घंटे में मरीज डिस्चार्ज कर दिया है। अब मरीजों को हार्ट बाईपास सर्जरी के लिए दिल्ली-जयपुर नहीं जाना पड़ेगा। सीटीवीएस विभाग के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल ने बताया बोदला निवासी रतन लाल शर्मा (66) के हृदय की तीन में से दो नस पूरी तरह से बंद थीं। एक ही नस से हृदय तक रक्त संचार हो रहा था। हार्टअटैक आने से हृदय के कार्य करने की क्षमता भी 35 फीसदी रह गई थी। एक और हार्टअटैक से जान का खतरा था। ऐसे में बीटिंग हार्ट तकनीक से मरीज की हार्ट बाईपास सर्जरी की गई। 72 घंटे आईसीयू में रखने के बाद मरीज को चलाकर देखा गया। बेहतर स्थिति होने पर डिस्चार्ज कर दिया है। ऑपरेशन टीम में डॉ. शिव, डॉ. सुलभ गर्ग, डॉ. आरती, एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर के डॉ. अपूर्व मित्तल, डॉ. योगिता, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. अमिता, डॉ. रोहन, डॉ. अखिल और डॉ. विकास यादव रहे। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि पहली बार एसएन में हार्ट बाईपास सर्जरी हुई है। इनका असाध्य रोग योजना के तहत निशुल्क ऑपरेशन हुआ है। मरीजों को अब दूसरे शहरों में सर्जरी के लिए नहीं जाना पड़ेगा।