झांसी के शिवपुरी हाईवे से सटे गांव डगरवाहा में शनिवार को पारंपरिक लठामार होली की धूम रही। एक छोर से बड़े लठा लिए गांव की औरतें इकठ्ठा हुईं तो दूसरी ओर से हुरियारों की सेना खाती बाबा के जयकारे लगाते हुए चली आ रही थी। सारा गांव नजारा यह नजारा देखने उमड़ पड़ा लेकिन सड़कें फिर भी सूनी रहीं। माहाैल को भांप सब अपनी छतों पर ही लटके थे। बुंदेलियों की 1100 साल पुरानी परंपरा के अनुसार गांव के खातीबाबा मंदिर के बाहर मैदान में लगभग 50 फीट ऊंचे खंभे पर पोटली में गुड़ और नकदी बांधकर टांग दी जाती है, जिसे उतारने के लिए हुरियारों की टोलियां पहुंचती हैं। महिलाएं लट्ठ मारकर हुरियारों को रोकती हैं। गांव की लठामार होली देखने के लिए आसपास के कई गांवों के सैकड़ों लोगों का हुजूम यहां पहुंचा। इस आयोजन का हिस्सा बने लोगों के लिए यह दृश्य अविस्मरणीय पल बनकर उनके जहन में सदा के लिए बस गया। गांव में दोपहर बाद से शुरू हुई होली शाम तक जारी रही।