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VIDEO : गणतंत्र दिवस पर कर्तव्यपथ पर दिखेगी सिरमौर के पारंपरिक सिंटु नृत्य की छलक

अंकेश डोगरा Updated Sun, 08 Dec 2024 10:55 AM IST

राष्ट्रपति भवन छराबड़ा में आयोजित विंटर कार्निवल के दौरान सिरमौर के प्रसिद्ध सिंटु नृत्य प्रस्तुत किया गया। दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड के लिए भी हिमाचल की ओर से सिंटु नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। यह नृत्य हाटी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और जीयो जीयो बणो रे मृगो जैसे गीतों पर आधारित है। इस नृत्य से प्रकृति और वन्यजीवन के संरक्षण का संदेश दिया जाता है। सिंटु शब्द का अर्थ शेर का बच्चा है। यह नृत्य सिरमौर के माटलोडी और कुपर क्षेत्रों में विशेष अवसरों पर किया जाता है। कुपर में इसे दिवाली और माटलोडी में एकादशी के अवसर पर किया जाता है। नृत्य के दौरान देवता की पालकी पर विराजमान किया जाता है। वे नृत्य के लयबद्ध प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सिंटु नृत्य पेड़ों की सरसराहट और हवा की ध्वनि के साथ तालमेल बिठाता है। इस नृत्य में कलाकार शेर, बाघ, मोर, भालू और बंदर जैसे जानवरों के मुखौटे पहनते हैं। वे सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं, जो दर्शकों को मनुष्य और जानवरों के बीच सामंजस्य और सह-अस्तित्व का संदेश देता है। सिंटु नृत्य खासतौर पर बच्चों के बीच लोकप्रिय है। यह सिखाता है कि प्रकृति और उसके प्राणियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना जरूरी है। सिंटु नृत्य वन्यजीवन के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण का आह्वान करता है। यह नृत्य विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया था, लेकिन 2003 में इसे डॉ. जोगेंद्र हाबी, जोड़ेशवरी और आशा फाउंडेशन के प्रयासों से इसे पुनर्जीवित किया गया। लोक कथाओं और साहित्य के आधार पर इस नृत्य को पुनर्जीवन दिया है। इसके बाद से नृत्य ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विशेष पहचान बनाई है। जोड़ेशवरी और आशा ग्रुप राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 5000 से ज्यादा बार इसका प्रदर्शन कर चुके हैं। डॉ. हाबी के ने बताया सिंटु नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति हमारे दायित्व को भी रेखांकित करता है। आज के समय में ऐसी परंपराओं का संरक्षण बेहद जरूरी है।

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