एडवांस्ड स्ट्डीज में मंगलवार से हिमाचल की प्राचीन लिपियों और पांडुलिपियों के संरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। सिद्धार्थ विहार सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में पश्चिमी हिमालय क्षेत्र की उन दुर्लभ लिपियों और पांडुलिपियों पर चर्चा हो रही है और प्रदर्शनी लगाई गई है जिनका संबंध शारदा लिपि से विकसित परंपराओं जैसे पाबुची, भाटकशरी, पंडवानी और चंदवानी से है। विशेषज्ञ इन सांचा पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और उनके पाठन की तकनीकी चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन और विषय परिचय ओम प्रकाश शर्मा शर्मा टैगोर फेलो ने किया जिन्हें इस क्षेत्र के विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस दौरान एक विशेष प्रदर्शनी का भी किया गया, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हालिया शोध में सामने आई पांडुलिपियां केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि हिमाचली भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का ठोस प्रमाण हैं। ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि यदि इन पांडुलिपियों का समयबद्ध संरक्षण और अध्ययन सुनिश्चित किया जाता है तो यह न केवल शोध के नए आयाम खोलेगा, बल्कि हिमाचली भाषा को क्षेत्रीय दर्जा दिलाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।