अलवर जिले के राजगढ़ थाना क्षेत्र में बेटे पर चोरी का आरोप लगाने के बाद आरोपी द्वारा मानसिक प्रताड़ना देने के चलते 60 साल के व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार, लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के कजोता गांव निवासी धर्मचंद सेन की नाई की दुकान थी, जो क़ादोली बाइपास पर है। इसी के समीप धर्मचंद का पुत्र राधेश्याम वाहन खरीदने-बेचने की दुकान पर कार्य करता है।
बता दें कि डेढ़ महीने पहले ओमी जांगिड़ की दुकान से तीन लाख रुपये चोरी हो गए थे, जिसको लेकर ओमी ने धर्मचंद के पुत्र राधेश्याम पर चोरी का आरोप लगाते हुए राधेश्याम को गिरफ्तार करा दिया। जहां तीन दिन थाने में जांच करने के बाद राधेश्याम निर्दोष साबित हुआ। लेकिन दुकान मालिक उसके पिता धर्मचंद को डेढ़ महीने से मानसिक प्रताड़ना दे रहा था, जिससे परेशान होकर शुक्रवार सुबह धर्मचंद सेन ने जहरीली दवा का सेवन कर लिया और उसके बाद फंदा लगाकर फांसी पर झूल गया।
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धर्मचंद को गंभीर हालत में अलवर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मृतक के परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाती, तब तक घरवाले शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराएंगे और न ही डेड बॉडी को हाथ लगाने देंगे। आरोपियों में ओमी जांगिड़ उसके साथी योगेश ओर दो अन्य लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
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परिवारजनों का कहना है कि आरोपियों ने धर्मचंद के बेटे को झूठ फंसा दिया। जबकि उसने कोई चोरी नहीं की थी। खुद पुलिस ने भी धर्मचंद के बेटे को निर्दोष मानते हुए तीन दिन बाद छोड़ दिया था। हालांकि, बेटा तो छूट गया लेकिन धर्मचंद इस आरोप से इतना प्रताड़ित था कि उसने मर जाना बेहतर समझा और अंततः अपनी जान दे दी।