अपने घोड़े को प्यार देना तो कोई किसान चरणजीत सिंह से सीखे। उसकी माैत पर चरणजीत सिंह ने बाकायदा कार्ड छपवाए और लोगों को न्योता भेजकर उसकी अंतिम अरदास में बुलाया। खासी कलां गांव के किसान चरणजीत सिंह ने आठ अक्तूबर को 38 माह की उम्र में अपने घोड़े फतेहजंग की मौत के बाद उसकी आत्मिक शांति के लिए गांव के परमेश्वर द्वार गुरुद्वारा साहिब में अंतिम अरदास करवाई।