शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व सिंह साहिब ज्ञानी मोहन सिंह जी की पावन स्मृति में सच्चखंड श्री दरबार साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। कीर्तन और अरदास के उपरांत संगत ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि गुरु की रजा में जीवन व्यतीत करने वाले सेवाधारी लोक और परलोक दोनों संवार लेते हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानी मोहन सिंह जी ने अपना संपूर्ण जीवन गुरु घर की निस्वार्थ सेवा को समर्पित किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे नियमित रूप से दरबार साहिब में दर्शन और सिमरन करते रहे। धामी ने बताया कि ज्ञानी जी ने अपने जीवनकाल में वसीयत कर अपना निवास गुरु रामदास जी की पावन नगरी से जोड़ दिया। उनके पुत्र सरदार तरलोचन सिंह और माता सुरजीत कौर ने मकान की चाबियां एसजीपीसी के जनरल मैनेजर सरदार भगवंत सिंह धंगेरा को सौंप दीं। उन्होंने घोषणा की कि ज्ञानी मोहन सिंह जी का चित्र केंद्रीय सिख अजायब घर में स्थापित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके सेवा और सिमरनमय जीवन से प्रेरणा ले सकें। इस दौरान प्रसिद्ध कथा वाचक ज्ञानी पिंदरपाल सिंह ने कहा कि ज्ञानी मोहन सिंह जी का जीवन सिख समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने गुरु की मर्यादा के अनुरूप जीवन जीकर संगत को सच्ची राह दिखाई।