अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अंतरिंग कमेटी की अहम बैठक के बाद कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आए। कमेटी सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर ने प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी। बैठक में सबसे अहम मुद्दा भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा से जुड़ा रहा। SGPC ने फैसला लिया कि राजोआणा की दया याचिका वापस लेने या न लेने के अंतिम निर्णय के लिए मामला श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष रखा जाएगा। अब जथेदार साहिबान के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी। झब्बर ने कहा कि राजोआणा पिछले 32 वर्षों से जेल में हैं और केंद्र सरकार उनकी दया याचिका पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है। इसके अलावा, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में पंजाब के अधिकारियों की नियुक्ति समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले की भी कड़ी निंदा की गई। SGPC ने इसे पंजाब के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। बैठक में बेअदबी कानून संशोधन बिल को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। झब्बर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार सिख संस्थाओं के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश धार्मिक प्रबंधन में दखल है। उन्होंने यह भी कहा कि बरगाड़ी और बेहबल कलां जैसे बेअदबी मामलों में अब तक दोषियों को सजा नहीं मिली है, जिससे लोगों में रोष है। SGPC ने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों का संगत द्वारा समय आने पर जवाब दिया जाएगा।