जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को लेकर जारी विवाद के बीच अब अमृतसर की दुर्गियाना मंदिर कमेटी के पदाधिकारी भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक विषय पर बनी फिल्म के संबंध में फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए। यदि फिल्म में इतिहास को सही तरीके से प्रस्तुत किया गया है तो उसे देखने और समझने का अवसर लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां फिल्म में जो घटना करम दिखा है वह किस दिशा में जा रहा हे ये वक़्त बताएगा। कमेटी पदाधिकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि किसी समुदाय की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास से जुड़े मुद्दों पर टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। सरकार और संबंधित एजेंसियां सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा कर उचित निर्णय लें, ताकि किसी भी तरह का भ्रम या विवाद पैदा न हो। साथ ही उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।