रायसेन में दशहरे के मैदान में अपनी धान की उपज लेकर पहुंचे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रात में ओस की वजह से कंबल गीला हो गया तो तिरपाल से कभी अपनी धान की उपज को बचाते तो कभी बचा हुआ तिरपाल का हिस्सा खुद पर ढकते किसान दिखाई दे रहे हैं। मंडी समिति द्वारा अलाव की व्यवस्था भी नहीं की गई थी। जिसकी वजह से किसानों को पूरी रात जागकर बितानी पड़ी।
आपको बता दें कि रायसेन में बीते तीन दिन से रात का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री दर्ज किया जा रहा है, ऐसे में करीब 400 किसानों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई। अपनी धान की उपज लेकर किसान एक दिन पहले रविवार को दिन में ही पहुंच गए थे। किसानों को नीलामी के लिए 25 से 30 घंटे का इंतजार करना पड़ा। इसका मुख्य कारण यह है कि रायसेन में धान की अधिक आवक हो रही है।
हर दिन 25 से 30 हजार क्विंटल धान मंडी में पहुंच रही है। जिससे करीब एक हजार ट्रालियां दशहरे मैदान में पहुंचती हैं व्यापारियों के द्वारा सुबह 11 बजे से नीलामी की जाती है। फिर दोपहर में लंच होने के बाद ढाई से तीन बजे के बीच फिर नीलामी शुरू होती है। ऐसी स्थिति में अधिक आवक होने के कारण किसान पहले से ही अपनी धान की उपज लेकर दशहरे मैदान में पहुंचने लगते हैं।
बैरसिया तहसील के किसान महेश कुमार भार्गव ने बताया कि वो एक दिन पहले रविवार को ही अपनी धान की उपज लेकर दशहरे मैदान पहुंच गए थे जिस कारण उन्हें तेज सर्दी के बीच रात बितानी पड़ी। दशहरा मैदान में मंडी समिति की ओर से अलाव की व्यवस्था भी नहीं की गई थी।
जिस कारण उन्हें ओस और कड़ाके की ठंड के बीच नींद नहीं लगी। उन्होंने आगे बताया कि यहां किसान अपने हिसाब से ट्रालियों को खड़ा करते हैं ऐसी स्थिति में कई बार जाम की स्थिति भी बनती है। और कई ट्रालियां फंस जाती है।