लखनऊ में करीब पांच महीने तक चले कानूनी विवाद के बाद फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड से सपा के ललित तिवारी ने आखिरकार पार्षद पद की शपथ ले ली। रविवार को महापौर सुषमा खर्कवाल ने उन्हें शपथ दिलाई। नगर निगम के 66 साल के इतिहास में यह पहला मामला माना जा रहा है, जब कोर्ट के आदेश पर किसी पार्षद को शपथ दिलाई गई हो। फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड से भाजपा के प्रदीप शुक्ला टिंकू चुनाव जीते थे, जबकि सपा के ललित तिवारी दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों के बीच करीब 1700 वोटों का अंतर था। चुनाव परिणाम के बाद ललित तिवारी ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि प्रदीप शुक्ला ने अपने शपथ पत्र में वैवाहिक स्थिति को लेकर गलत जानकारी दी है। मामले की सुनवाई के बाद करीब पांच महीने पहले अपर जिला जज की अदालत ने प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन निरस्त कर ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया था। इसके बावजूद शपथ ग्रहण नहीं कराया गया। इसे लेकर ललित तिवारी ने नगर निगम, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त कार्यालय और शासन स्तर तक पत्राचार किया। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने शपथ ग्रहण कराने के आदेश जारी किए, लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस पर 21 मई को हाईकोर्ट ने महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। इसी दौरान महापौर कमांड अस्पताल में भर्ती हो गई थीं। उन्होंने तब कहा था कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद ही इस मामले में कदम उठाया जाएगा। शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद रविवार को उन्होंने ललित तिवारी को शपथ दिलाई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर भाजपा के कुछ पार्षदों और समर्थकों ने सवाल उठाए। उनका कहना था कि उपविजेता को सीधे निर्वाचित घोषित करने के बजाय वार्ड में दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए था। भाजपा पार्षद अनुराग मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन रामपुर में आजम और अब्दुल्ला आजम के मामले में गलत शपथ पत्र के आधार पर चुनाव रद्द होने के बाद पुनर्मतदान कराया गया था, इसलिए यहां भी वही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।