रात्रि कालिमा बाहुपाश में, है दिव्य दिवाकर को घेरे ।
अंधियारों के पीछे पीछे बेबस दौड़ रहे सवेरे ।
मन में रख मधुमास, पतझड़ों को भरना नहीं है ..!
मृत्यु से पहले मरना नहीं है ..!!
अवनी से अम्बर तक अपनी विजय पताकायें फहरी हैं ।
विपदाएं आई हैं, पर सोचो, कितनी देर वो ठहरी हैं ।
निज शौर्य गाथाओं को लज्जित कभी करना नहीं हैं...!
मृत्यु से पहले मरना नहीं है ..!!
कुंठित सोच, नकारात्मकता के आवरण को फाड़कर ।
स्वच्छ कर मानस पटल को, भय शोक तम को झाड़कर ।
आवेग प्रभंजन के चक्रवात में, किंचित तुम्हें फंसना नहीं है..
मृत्यु से पहले मरना नहीं है ..!!
हम में है बुद्धि बल और हृदय विशाल है ।
शुभाशीष बुजुर्गों का और कृपापुंज महाकाल है ।
काल के कराल से फिर तनिक डरना नहीं है…!
मृत्यु से पहले मरना नहीं है ..!!
लेखनी से -
✍️ हरवंश श्रीवास्तव 'हर्फ़'
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5 वर्ष पहले