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वीडियो कविता : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

काव्य डेस्क

Irshaad
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                                                  सामूहिकता के अनुभवों और जनता की आवाज़ बन जाने के बावजूद फैज़ की शायरी में ऐसा कुछ तो मौजूद ही है जो फै़ज़ का बिल्‍कुल अपना है। फै़ज़ की चेतना फ़ैज़ के व्‍यक्तित्‍व से अलग नहीं है। फ़ैज़ का जीवन उनका स्‍वभाव, उनका अक्‍खड़पन और निराला अंदाज़ उनकी शायरी का भी मिज़ाज है। 

 
8 वर्ष पहले
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