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West Bengal Elections 2026 Voting: पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान, TMC ने बताया अपनी जीत का फैक्टर!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Fri, 24 Apr 2026 02:30 AM IST

TMC के उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा, "SIR की प्रक्रिया के दौरान जिसमें 58 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए थे. बंगाल में, वोटिंग आमतौर पर 80–85% होती है। उन्होंने बहुत सारे लोगों के नाम यह कहकर हटा दिए कि वे 'अनुपस्थित मतदाता' हैं.बड़ी संख्या में नाम हटा दिए गए। पश्चिम बंगाल में मतदान को लोकतंत्र के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। 2021 में जो संकेत था, 2016 में जो संकेत था वही संकेत 2026 में है.लोग ममता बनर्जी के लिए वोट कर रहे हैं। TMC को मिलने वाली सीटों की संख्या बढ़ने वाली है।"

उन्होंने आगे कहा, "जो हिंसा हो रही है उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। स्वाधीन भारत के इतिहास में यह अभूतपूर्व है कि जितने CRPF इस समय बंगाल में हैं, वह कश्मीर में भी नहीं है.इसके बावजूद अगर कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।

जय प्रकाश मजूमदार द्वारा दिया गया यह बयान पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठ रहे विवादों को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि Election Commission of India द्वारा संचालित SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मजूमदार के अनुसार, बंगाल में परंपरागत रूप से 80–85 प्रतिशत तक मतदान होता रहा है, जो यह दर्शाता है कि यहां की जनता चुनावों को केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतंत्र के उत्सव के रूप में देखती है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना न केवल संदेह पैदा करता है बल्कि चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से कई को “अनुपस्थित मतदाता” बताकर सूची से बाहर किया गया, जबकि हकीकत में वे नियमित रूप से मतदान करने वाले नागरिक थे। इस प्रकार की कार्रवाई से बड़ी संख्या में लोगों का मताधिकार प्रभावित हुआ है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। तृणमूल कांग्रेस के नेता का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि एक सुनियोजित कदम हो सकता है, जिससे चुनावी परिणामों को प्रभावित किया जा सके।
मजूमदार ने अपने बयान में 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया, जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस को स्पष्ट जनसमर्थन मिला था।

 उनका कहना है कि जिस तरह का माहौल उन चुनावों में देखने को मिला था, वही संकेत 2026 के चुनावों में भी दिखाई दे रहा है, जहां जनता एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि तमाम चुनौतियों और विवादों के बावजूद बंगाल की जनता लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आएगी और अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करेगी।

कुल मिलाकर, यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों को रेखांकित करता है। यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची, मतदान प्रतिशत और प्रशासनिक प्रक्रियाएं आने वाले चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनेंगी, और इन पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।

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