जेएनयू बवाल पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यूनिट के सेक्रेटरी प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा, "कल JNU के कुछ लेफ्टिस्ट ऑर्गनाइज़ेशन ने साबरमती टी पॉइंट से VC के घर तक मार्च निकालने का आह्वान किया था.फिर वे स्कूल एरिया में घुस गए और स्टूडेंट्स को धमकाया और उनके पास हॉकी स्टिक, लोहे की रॉड, पत्थर, चाकू थे. उन्होंने कुछ स्टूडेंट्स पर हमला भी किया। ABVP के कुछ वर्कर्स को भी पीटा गया.जब हमने उनके कैंप में रखे डंडों, रॉड, पत्थरों का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो उन्होंने हमारे फोन छीन लिए और कुछ तोड़ भी दिए.उन्होंने हम पर पत्थर भी फेंके और हममें से कुछ ने अपनी जान बचाने के लिए स्कूल की बिल्डिंग में शरण ली.हमारे 6-7 वर्कर्स बुरी तरह घायल हो गए हैं और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हाल ही में हुए बवाल को लेकर छात्र राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि कैंपस में हुई झड़प और अव्यवस्था के पीछे वामपंथी छात्र संगठनों की साजिश थी। ABVP का कहना है कि कुछ लेफ्ट समर्थित संगठनों ने जानबूझकर माहौल खराब करने और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करने की कोशिश की। संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, एक निर्धारित कार्यक्रम के दौरान पोस्टर फाड़ने, नारेबाजी करने और उकसावे की कार्रवाई की गई, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस झड़प में बदल गई। ABVP ने यह भी आरोप लगाया कि लेफ्ट संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पहले धक्का-मुक्की शुरू की और उनके कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम स्थल से हटाने का प्रयास किया।
दूसरी ओर, वामपंथी छात्र संगठनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। उनका कहना है कि ABVP ने खुद माहौल को भड़काया और शांतिपूर्ण विरोध को बाधित करने की कोशिश की। लेफ्ट संगठनों के अनुसार, वे किसी मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन ABVP कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपनाया जिससे विवाद बढ़ा। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन ने कहा कि परिसर में किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ विश्वविद्यालय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, घटना के दौरान कुछ छात्रों को मामूली चोटें भी आईं, हालांकि किसी गंभीर घायल की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर परिसर में निगरानी बढ़ा दी गई है और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जेएनयू में छात्र राजनीति लंबे समय से सक्रिय और वैचारिक रूप से विभाजित रही है, जहां विभिन्न विचारधाराओं के संगठन अपनी-अपनी नीतियों और मुद्दों को लेकर आमने-सामने आते रहे हैं। ताजा विवाद ने एक बार फिर कैंपस की राजनीति को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और परिसर में शांति व संवाद के माध्यम से ही मतभेद सुलझाने पर जोर दिया जाएगा।