करोड़ों खर्च के बावजूद गोवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहा है। सड़कों के किनारे, खेतों में यहां वहां हर जगह, हर गांव में बेसहारा गोवंश आसानी से देखा जा सकता है। जिसका नतीजा है कि एक तरफ यह किसानों के खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेतों में फसल के अलावा किसानों के लिए चारे का काम देने वाले घास वाले क्षेत्र को चर जा रहे हैं। इसके अलावा सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। रात के वक्त इस तरह की दुर्घटनाएं होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती हे। जब अधिकांश बेसहारा गोवंश सड़कों पर ही डेरा जमाए रहता है। ऐसा नहीं है कि सरकार की तरफ से इस समस्या के निदान के लिए प्रयास नहीं किया गया । परंतु प्रयास कितना सार्थक हुआ। अब यह सवाल उठने लगा है। क्योंकि सरकार की तरफ से क्षेत्र में जो गोशालएं खोली गई और उनमें सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपए का खर्च भी किया गया। इन गोशालाओं को नियमानुसार गोशाला संचालकों को दिया गया। इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में गोवंश अब भी लावारिस हालात में इधर उधर घूमते मिल जाते हैं। क्या जितनी गोशालाएं बनवाई गई हैं। वह संख्या पर्याप्त नहीं है अथवा गोशालाओं तक गोवंश पहुंच नहीं पा रहा है या संचालन में कुछ खामियां है। या फिर गोशालाओं का निर्माण कर उनपर करोड़ों खर्च कर सरकार, प्रशासन ने अपने कर्त्वय का पालन हो चुका मान लिया है। क्षेत्र में हंबोली, धंधड़ी में गौशालाओं के संचालन के लिए दो संस्थाओं ने प्रशासन के साथ एमओयू साईन किया हुआ था। कटौहड़ कलां में 2021 में गौशाला के लिए भूमि पांच कनाल से बढ़ाकर 26 कनाल की गई और इकयावन लाख विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए खर्च किया गया। पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में लक्ष्य तय किया गया था कि जुलाई 2022 तक गोवंश के लिए पूरी व्यवस्था कर ली जाएगी। लेकिन अब हालात पहले की तरह बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सड़कों पर लावारिस गाय देखा जाना पहले जैसा आम हो गया है। इन दिनों राष्ट्रीय उच्च मार्ग 3 अंब नदौन मार्ग पर पतेहड़, ठंडा पानी, लंग्याणा, लाहड़ और ज्वार में इन दिनों लावारिस गोवंश की भरमार है। जोकि सड़कों के बीचों बीच अथवा किनारे हर वक्त देखे जा सकते हैं। जिस कारण वाहन चालाकों को अपने वाहनों और गोवंश को ध्यान में रखकर वाहन चलाना पड़ता है। सड़क के बीचों बीच खड़े गोवंश के कारण वाहनों को रोककर उन्हें हटाना भी पड़ जाता है।