हिमाचल सरकार की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना प्रदेश के युवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना से प्रदेश के अनेकों युवा न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि प्रदेश में हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह योजना मील का पत्थर बनी है। योजना के लाभार्थियों में शामिल ऊना उपमंडल के रामपुर के 29 वर्षीय हरदीप कुमार की कहानी सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। कभी सैलून चलाकर गुजर-बसर करने वाले हरदीप ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना का लाभ उठाया और सरकारी सब्सिडी पर ई-टैक्सी ली। अब उनकी ई-टैक्सी जलशक्ति विभाग ऊना में अटैच है, जहां से उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये की निश्चित आय हो रही है। यह परिवर्तन उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और स्थिरता लेकर आया है। हरदीप की तरह ही, ऊना जिले के अन्य लाभार्थी बढ़ेड़ा के संजीव और दुलैहड़ के अशोक कुमार का जीवन भी राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना से खुशहाल हुआ है। पहले निजी टैक्सी चलाने वाले इन दोनों को तेल की महंगाई और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन इस योजना के तहत दोनों ने इलेक्ट्रिक कारें लीं, जिन्हें जलशक्ति विभाग के साथ ई-टैक्सी के तौर पर अटैच किया गया। अब वे हर महीने 50-50 हजार रुपये की निश्चित आय प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन में सुखमय समृद्धि का अनुभव कर रहे हैं।