स्वतंत्रता संग्राम और 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी वीरता की मिसाल पेश करने वाले परिवार को आज सरकारी उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। स्वतंत्रता सेनानी तेजा सिंह के परिवार की शौर्य गाथा इतिहास में दर्ज है, लेकिन उनकी विरासत आज दुर्दशा की शिकार है। 84 वर्षीय ऑनरेरी कैप्टन सुखदेव सिंह को 1971 के युद्ध में वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, लेकिन आज भी अपने गगरेट क्षेत्र के गांव मवा कहोलां में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके घर तक पहुंचने के लिए एक अदद रास्ता भी नहीं है, जिसकी फरियाद लिखित में वे जिलाधीश ऊना और स्थानीय विधायक से लगा चुके हैं। एक ऐसा परिवार, जिसने स्वतंत्रता और भारत की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया, उसे आज उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है। कैप्टन सुखदेव सिंह के पिता, तेजा सिंह, आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके बड़े बेटे सुखचैन सिंह 1971 के लोंगेवाल युद्ध में राजस्थान की रेतीली सरहद पर शहीद हुए थे तथा दूसरे बेटे कैप्टन सुखदेव सिंह ने उसी युद्ध में अपनी असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया था और वीर चक्र हासिल किया था।