रामपुर उपमंडल के आपदा प्रभावित सुंडा-सनेई मार्ग पर शनिवार सुबह एक बार फिर भूस्खलन होने से बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सुबह करीब 10:30 बजे अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण एक बैल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसी समय जगूणी से रामपुर जा रही एक पिकअप वाहन पत्थरों की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गई। चालक सुरक्षित रहा और बड़ा हादसा टल गया। क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण नीचे बसे दो गांवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क अब बेहद संवेदनशील हो चुकी है और यहां से गुजरना जोखिम भरा बन गया है। डंसा पंचायत की प्रधान पदमा कुमारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि इस सड़क से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा लोग, दुग्ध उत्पादक और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण आवाजाही करते हैं। सेब सीजन के दौरान बागवान भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं, जिससे उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि आगामी दिनों में भारी बारिश जारी रहती है तो बड़े पैमाने पर भूस्खलन होने की आशंका है, जिससे हजारों लोगों का संपर्क प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, रात के समय वाहनों की आवाजाही पर रोक और लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। शुक्रवार को रचोली और डंसा पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह से भी मुलाकात कर मामले का स्थायी समाधान करने की मांग रखी थी। प्रतिनिधिमंडल ने वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर संयुक्त विभागीय समिति गठित करने और क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित कर आवश्यक बजट उपलब्ध कराने की मांग की। प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए जिलाधीश शिमला को प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित करने और बजट स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।