सर्व देवता सेवा समिति की कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को देव सदन मंडी में समिति अध्यक्ष शिवपाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इसमें देवी-देवताओं के गूर, पुजारी और कारदारों ने भाग लिया। हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा को लेकर विचार-विमर्श किया गया। समिति ने दावा किया कि देवताओं ने गूरों के माध्यम से देव वाणी में यह स्पष्ट किया कि इन्सान अपनी मर्यादाएं भूल कर तीर्थस्थलों को पिकनिक स्थल बना रहे हैं। पवित्र कुंडों के समीप शराब की बोतलें और अन्य वस्तुएं मिलीं। देवस्थलों जैसे कमरुनाग, पराशर, रिवालसर आदि के जलकुंड पवित्र माने जाते हैं और देवशक्ति का आधार होते हैं। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि मंदिरों और देव स्थलों के समीप किसी भी प्रकार के पर्यटन स्थल या विश्राम गृह न बनाए जाएं। सड़कों की दूरी मंदिरों से कम से कम तीन किलोमीटर तक रखी जाए। कारदारों ने कहा कि शिकारी, जोगनी, तुंगेश्वरी, फूंगणी देवी और नौनी जोगनी जैसे स्थलों पर आमजन का जाना वर्जित था, परंतु सड़क सुविधा मिलने से लोग वहां पिकनिक मनाने लगे हैं, जो परंपराओं के विपरीत है। बैठक में चर्चा हुई कि मंडी जिले में देवताओं के सामूहिक निर्णय के लिए कोई स्थायी स्थान (जगती) नहीं है। इस संबंध में सुझाव दिया कि भूतनाथ मंदिर के गर्भगृह के बाहर ऐसा स्थान बनाया जा सकता है, जहां सभी देवी-देवताओं के गूर बैठकर निर्णय ले सकें। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक समिति अपने-अपने देवताओं से अनुमति लेकर आगे की प्रक्रिया तय करेगी। अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने सभी कारदारों और समितियों को निर्देश दिए कि कोई भी सदस्य यदि देव परंपरा का उल्लंघन करता है तो उसे तत्काल पद से हटाया जाए और उसकी जगह चरित्रवान व्यक्ति को नियुक्त कर देव कार्यों को देवनीति के अनुसार चलाया जाए। बैठक में तीर्थ राज, राजू राम, मोहन लाल, सुरेंद्र भगोरिया, हेम राज, भीम देव, हुक्म चंद, रेवती राम आदि अन्य सदस्य मौजूद रहे।