बड़ा देव कमरुनाग से जुड़ा गुरापीरी का लंबा चला विवाद अब थम गया है। सात गढ़ के लोगों ने देवता के परता स्थल धगयारा गलू में जुटकर सर्वसम्मति से पुजारी बोधराज को बड़ा देव कमरुनाग का गूर स्वीकार करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के साथ ही देव परंपरा को लेकर बनी असमंजस की स्थिति भी समाप्त हो गई है। निर्णय के अनुसार पुजारी बोधराज आगामी मंडी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में देवता के साथ पुजारी के रूप में ही मंडी जाएंगे। मेले के समापन के बाद नव संवत के अवसर पर धार्मिक विधि-विधान के साथ उन्हें गूर पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व पूर्व गूर देवी सिंह द्वारा दिया गया परता सात गढ़ के लोगों को मान्य नहीं हुआ। इसके बाद लगातार बैठकों और धार्मिक विमर्श के बीच धगयारा गलू में आयोजित महाजुटान में पुजारी बोधराज के नाम पर सर्वसम्मति बन पाई। प्रदेशभर में आस्था के केंद्र माने जाने वाले बड़ा देव कमरुनाग का मंडी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले से विशेष जुड़ाव है। परंपरा के अनुसार देवता के मंडी पहुंचते ही शिवरात्रि महोत्सव का विधिवत शुभारंभ माना जाता है। देवता के कटवाल चिन्तराम ठाकुर ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि सात गढ़ के लोगों की सहमति से पुजारी बोधराज को गूर बनाए जाने का फैसला हुआ है और आगे की धार्मिक प्रक्रिया देव रीति-रिवाजों के अनुसार पूरी की जाएगी।