कांग्रेस का कोई बड़ा कार्यक्रम हो और उसमें किसी तरह का विवाद खड़ा न हो, ऐसा हो नहीं सकता। वीरवार को भी कांग्रेसियों ने अपनी इस परंपरा को जारी रखते हुए जमकर अपने गुब्बार निकाले। इस बार छोटे नेताओं के स्थान पर दो बड़े नेताओं के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिली। पूरा मामला पूर्व सीपीएस एवं सुंदरनगर के पूर्व विधायक सोहन लाल ठाकुर के संबोधन से शुरू हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में जिला की पूर्व कार्यकारिणी को लेकर सिर्फ इतना कहा कि पूर्व कार्यकारिणी में 400 लोग थे, लेकिन जब धरना प्रदर्शन या इकट्ठे होने की बात आती थी तो 40 भी इकट्ठा नहीं होते थे। उन्होंने एक तरह से निष्क्रिय पदाधिकारियों को लेकर अपनी बात कही। इसके बाद जब संबोधन की बारी पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी की आई तो उन्होंने सोहन लाल ठाकुर की बात पर जमकर अपना गुब्बार निकाल दिया। क्योंकि पूर्व में प्रकाश चौधरी ही जिलाध्यक्ष थे। प्रकाश चौधरी ने निष्क्रिय कार्यकारिणी को लेकर कही गई बात का इतना बूरा मान लिया कि खुले मंच से अध्यक्ष के सामने ही सोहन लाल ठाकुर को जमकर खरी-खरी सुना दी। चौधरी ने यहां तक कह दिया कि कार्यकारिणी में लोग नेताओं के कहने पर ही लिए जाते हैं। अभी विनय कुमार को भी ऐसा ही करना है। प्रकाश चौधरी की इस बात के बाद पंडाल में हंगामा मच गया और नारेबाजी होने लग गई। जैसे-तैसे कार्यकर्ताओं को शांत करवाया और प्रकाश चौधरी ने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि ’’छेड़ा नी देणा’’ यानी के छेड़ना नहीं चाहिए। वहीं, सोहन लाल ठाकुर की बात का समर्थन कौल सिंह ठाकुर ने भी किया। उन्होंने कहा कि सोहन लाल ठाकुर सिर्फ निष्क्रिय पदाधिकारियों को लेकर ही बोल रहे थे और यह सच्चाई भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को औहदेदारियां नहीं देनी चाहिए क्योंकि यह लिस्टें सीधे शिमला से ही आती हैं। पूर्व की प्रदेश कार्यकारिणी में भी ऐसे ऐसे लोग औहदों पर थे जिन्हें कोई जानता तक नहीं है। यह प्रथा अब बंद होनी चाहिए। वहीं, प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार ने भी खुले मंच से सभी को चेता दिया कि अनुशासन में रहना ही होगा और इसकी शुरूआत वे स्वयं से करेंगे। उन्होंने कहा कि अब सिफारिश पर सिर्फ वही लोग पदाधिकारी बनाए जाएंगे जिनकी परफॉर्मेंस ठीक होगी। परफॉर्मेंस ठीक न होने पर जिलाध्यक्ष भी हटा दिए जाएंगे।