हिमाचल प्रदेश फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति के संरक्षक ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर (सेवानिवृत्त) ने प्रदेश सरकार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका ( एसएलपी) दायर किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश के लाखों भूमि अधिग्रहण प्रभावित किसानों के साथ घोर अन्याय करार दिया। ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि 1 अप्रैल 2015 को तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार द्वारा जारी अधिसूचना, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मुआवजे का फैक्टर-1 (बाजार मूल्य का दोगुना) निर्धारित किया गया था को प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी एवं असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। यह निर्णय उनकी पिछले लगभग दस वर्षों से चली आ रही मांग की पुष्टि करता है।