बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार यज्ञोपवीत संस्कार रविवार को संपन्न हुआ। यज्ञोपवीत संस्कार में 108 बटुकों ने भाग लिया। बाबा बालक नाथ मंदिर के महंत राजेंद्र गिरि ने दो वर्ष पूर्व इस परंपरा को शुरू किया है। यज्ञोपवीत संस्कार में भाग लेने के लिए लोग न केवल हिमाचल, बल्कि अन्य राज्यों से भी यहां पहुंचे हैं। यज्ञोपवीत संस्कार में आठ से 12 वर्ष की आयु के बटुक अर्थात बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार किया गया। यज्ञोपवीत संस्कार के तहत शनिवार को कर्णवेद, मुंडन, यज्ञोपवीत व सावित्री दीक्षा का आयोजन किया, जबकि रविवार को वेदारंभ, भिक्षाटन, समावर्तन, नित्यचर्या-नियमोंपदेश संस्कार पूर्ण किया। यह संस्कार सुबह आठ बजे शुरू हुआ। यज्ञोपवीत संस्कार 22 फरवरी रविवार को दोपहर एक बजे तक आयोजित हुआ। महंत राजेंद्र गिरि ने बताया कि यह संस्कार सनातन धर्म की पहचान हैं, लेकिन वर्तमान समय में लोग इन्हें भूलते जा रहे हैं। ऐसे में इनके प्रति लोगों को जागरूक करना अनिवार्य है। शनिवार को कर्णवेद, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत सावित्री दीक्षा पूर्ण की गई, जबकि रविवार को वेदारंभ सुबह आठ बजे, भिक्षाटन सुबह दस बजे, समावर्तन पूर्वाह्न 11:30 बजे तथा नित्यचर्या दोपहर एक बजे संपूर्ण हुआ। यह यज्ञोपवीत संस्कार महंत निवास पर ही पूर्ण किया जा रहा है।