वन विभाग ने विलुप्त प्रजाति से संबंधित एक गिद्ध को रेस्क्यू कर नया जीवन दिया है। 8 दिसंबर को यह गिद्ध लोअर जुम्हार वन टीम बेसुध हालत में मिला था। इसे देखकर यही लग रहा था कि इसे करंट लगा है और शायद ही बच पाएगा, लेकिन वन खंड अधिकारी सुनील कुमार और वन रक्षक गजिंद्र ने बेसुध गिद्ध को बेसुध हालत में सुरक्षित तरीके से पशु चिकित्सालय चंबा पहुंचाया। वन मंडल अधिकारी को भी इसकी सूचना दी गई। इसके बाद वन विभाग ने पशु चिकित्सक से घायल गिद्ध का उपचार करवाया। गिद्ध को प्राथमिक उपचार के बाद विभाग ने अपने पास सुरक्षित रखा। वन विभाग के कर्मचारियों ने घायल गिद्ध का पूरी तरह ध्यान रखा। उसे समय पर दवाई से लेकर उसकी डाइट की की व्यवस्था की। गिद्ध ज्यादातर मांसाहारी होते हैं, इसलिए उसके खाने के लिए मांस की व्यवस्था की गई। दस दिन तक उपचार के बाद सोमवार को गिद्ध पूरी तरह स्वस्थ हो गया। जैसे ही उसे बंद कमरे से बाहर निकाला गया तो वह खुले आसमान में उड़ान भरकर उड़ गया। विभागीय कर्मचारियों में इस बात की खुशी दिखाई दी कि उन्होंने एक बेजुबान वन्य जीव को मौत के आगोश से जाने से बचाया। यह गिद्ध हिमालयन ग्रिफोन वल्चर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 में दर्ज है। इसका आईयूसीएन स्टेटस नियर थ्रेटेंड (एनटी) है। वन मंडल अधिकारी कृतज्ञ कुमार ने बताया कि गिद्ध दस दिन पहले बेसुध हालत में मिला था। जिसे रेस्क्यू करने के उपरांत सोमवार को खुले आसमान में उड़ा दिया गया। मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने रेस्क्यू करने वाली विभागीय टीम की सराहना की है।