सदर विधानसभा क्षेत्र की सरयूं धार को अन्य पिछड़े क्षेत्रों की तर्ज पर पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की मांग एक बार फिर उठी है। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में हिमकोफेड के निदेशक सदस्य आशीष ठाकुर ने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से पीछे है और लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। ऐसे में सरकार को विशेष पहल करते हुए सरयूं धार को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक सरयूं धार क्षेत्र की कई पंचायतों में बार-बार क्लाउड बर्स्ट की घटनाएं हुई हैं, जिससे लोगों की संपत्ति, कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा है। उनका कहना था कि प्राकृतिक आपदाओं का यह सिलसिला चिंता का विषय है और इसके पीछे के कारणों का वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन कराया जाना चाहिए। आशीष ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की कि कुह मझवाड़, हरलोग, बल्ह चुराणी-चुबानी, ननावां, सरयूं और चलेली पंचायतों में क्लाउड बर्स्ट की घटनाओं का वैज्ञानिक सर्वे करवाने के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजी जाए। उनका कहना था कि अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए प्रभावी योजना बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि सरयूं धार को पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया जाता है तो क्षेत्र के विकास के लिए विशेष बजट उपलब्ध होगा। इससे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव होगा और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हरलोग में उपतहसील कार्यालय को दोबारा बहाल करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि इससे क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।