सोनीपत के किसानों के लिए राहत की खबर है। रेलवे स्टेशन पर 2600 मीट्रिक टन (एमटी) यूरिया खाद की रैक लगी। कृषि अधिकारियों का कहना है कि सोनीपत में कुल 2600 एमटी यूरिया खाद पहुंचा है। इसमें से जल्द 900 एमटी दिल्ली तो 100 एमटी यूरिया खाद पानीपत भेजा जाएगा। शेष 1600 एमटी यूरिया खाद जिले के खाद विक्रेताओं तक पहुंचा जाएगा। कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि दिसंबर माह में यूरिया खाद की डिमांड बढ़ सकती है, क्योंकि किसान गेहूं की पहली सिंचाई के बाद यूरिया खाद का छिडक़ाव करते हैं। जिला में 1.45 लाख हेक्टेयर में गेहूं की औसतन बिजाई होती है। इसके अतिरिक्त पांच से सात हजार हैक्टेयर भूमि में किसान सरसों की बिजाई भी करते हैं। ऐसे में दिसंबर माह में यूरिया की डिमांड बढ़ जाती है। सोनीपत रबी सीजन के दौरान करीब 49 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की जरूरत पड़ती है। नवंबर माह के अंत में गेहूं का रकबा बढ़कर करीब 3.30 लाख एकड़ तक पहुंच गया है। विभाग को उम्मीद है कि दिसंबर माह के पहले सप्ताह तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। विभाग ने करीब 3.60 लाख एकड़ भूमि पर गेहूं की बिजाई का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले नवंबर माह की शुरुआत में किसानों को डीएपी खाद मिलने में हुई परेशानी के चलते गेहूं का रकबा काफी कम बढ़ा था। अंतिम सप्ताह में गेहूं की बिजाई में तेजी आई है। कृषि विभाग ने गेहूं के रकबे को बढ़ाने के लिए टीमों को फिल्ड में उतारा है। सप्ताह भर में रबी सीजन का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। फिलहाल जिला में यूरिया व डीएपी खाद की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि सोनीपत, खरखौदा, राई व गन्नौर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन गोहाना क्षेत्र में अब भी काफी रकबा शेष है। डीएपी खाद की डिमांड भी अधिकतर नवंबर माह तक ही रहती है। दिसंबर माह में यूरिया खाद की डिमांड बढ़ती है। सोनीपत में किसानों को यूरिया खाद की किल्लत न झेलनी पड़े, इसके लिए विभाग लगातार यूरिया खाद की डिमांड मुख्यालय भेज रहा है। रविवार को सोनीपत स्टेशन पर 2600 एमटी यूरिया खाद का रैक लगा है।