ओशो सद्गुरुदेव के छोटे भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि वास्तिवक अध्यात्म ध्यान में है। परमात्मा को पाने के लिए केवल अध्यात्म ध्यान जरूरी है। इसके लिए साधक को अपने अंदर उतरने की जरूरत है। इससे परमात्मा का अनुभव होना शुरू हो जाता है। आध्यात्म ध्यान का बाहरी दुनिया से कोई लेना देना नहीं है। संत कबीरदास ने बिना मंदिर-मस्जिद में जाकर भी परमात्मा को पाया है। अपनी सांसों पर ध्यान देंगे तो परमात्मा अवश्य मिल जाएगा। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती कमासपुर-दीपालपुर रोड स्थित रजनीश ध्यान मंदिर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बुधवार शाम को आध्यात्मिक चिंतक ओशो सद्गुरुदेव का जन्मदिन हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। कार्यक्रम में अनेक साधक शामिल होकर नृत्य-गायन के साथ परमात्मा में ध्यान लगाएंगे। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि जीवन को सुखमय व चिंतामुक्त बनाने के लिए साधक को अध्यात्म ध्यान में मन लगाना चाहिए। यदि धर्म के कारण युद्ध होते हैं तो फिर अधर्म क्या है, इस पर विचार करना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि मन के भीतर के ईश्वर को खोजने के लिए आडंबरों की जरूरत नहीं है, बल्कि केवल ध्यान से ही यह काम संभव है। साधक को वास्तविक उपलब्धि के लिए काल्पनिकता से दूर होना पड़ेगा।