फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरा गांव मेरी शान: खानपुर कलां बना फौजियों की धरती, आजादी के रण से लेकर आज तक कायम है शौर्य की परंपरा

सोनीपत जिले के गांव खानपुर कलां का इतिहास देशभक्ति और वीरता की मिसाल रहा है। यह गांव लंबे समय से फौजियों की धरती के रूप में जाना जाता है, जहां आज भी लगभग 200 से अधिक सैनिक देश सेवा से जुड़े हुए हैं। गांव के लोगों ने न केवल सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा की, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। गांव के प्रीत सिंह, रामकिशन सहित करीब 15 स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की लड़ाई में अपना अहम योगदान दिया। गांव की सैन्य परंपरा आज भी मजबूत है। यहां से एक कर्नल, तीन कैप्टन और तीन लेफ्टिनेंट पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि अन्य 165 से ज्यादा फौजी भी रिटायर होकर गांव या अन्य स्थानों पर जीवन यापन कर रहे हैं। इनमें से कुछ बुजुर्ग फौजी अब इस दुनिया में नहीं रहे, जबकि कुछ शहरों में बस गए हैं और बैंक व फैक्ट्री जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बाकी फौजी गांव में रहकर खेती, पशुपालन और छोटे-मोटे व्यवसाय के जरिए अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। रिटायर फौजी आज भी गांव में आपसी भाईचारे की मिसाल कायम किए हुए हैं। सभी मिलकर समय-समय पर समाजसेवा के कार्यों का आयोजन करते हैं और नई पीढ़ी को देशभक्ति के लिए प्रेरित करते हैं। स्वतंत्रता सेनानी प्रीत सिंह के पुत्र सेवा सिंह ने बताया कि उनके पिता अंग्रेजों की सेना में भर्ती होकर जर्मनी तक गए थे। वहां उन्होंने अंग्रेजों का साथ छोड़कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल होकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। सेवा सिंह ने अपने पिता को मिले दो ताम्रपत्र भी दिखाए। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था, जबकि वर्ष 1985 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने भी उन्हें सम्मानित किया। गांव खानपुर कलां की यह गौरवशाली परंपरा आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है, जो देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होकर गांव और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें