बरोदा गांव में पीने के पानी की समस्या अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। गांव की दो पंचायतों में जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। जर्जर डिग्गी और टूटी पाइपलाइन के कारण घरों तक शुद्ध पानी नहीं पहुंच पा रहा, जिससे लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जल विभाग और एसडीएम से की है लेकिन समस्या जस की तस है। बरोदा ठुठान पंचायत के लिए बनी पानी की टंकी (डिग्गी) को विभाग पहले ही जर्जर घोषित कर चुका है। इसी वजह से यहां नहरी पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है। यहां के लोग डीपट्यूबवेल के पानी के ही भरोसे हैं जो सेहत के लिए उपयुक्त नहीं है। दूसरी ओर, बरोदा मोर पंचायत में बनी दोनों डिग्गियां ठीक हालत में तो हैं लेकिन यहां भी नहरी पानी का संकट है। जलापूर्ति विभाग एक दिन छोड़कर नहरी पानी की सप्लाई करता है, लेकिन जब नहर में पानी नहीं आता तो डीप ट्यूबवेल के पानी की ही आपूर्ति की जाती है। ठुठान के ग्रामीणों के अनुसार दूषित पेयजल की समस्या का एक बड़ा कारण जर्जर पाइपलाइन है। गांव में बिछी सीमेंट की पुरानी पाइपलाइन कई जगह से टूट चुकी है। लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण इनमें गंदगी मिल जाती है और पानी दूषित हो जाता है। मजबूरी में लोगों को गंदा पानी पीना पड़ता है। उनका कहना है कि गांव में पानी की गुणवत्ता सही नहीं है। नहरी पानी का टीडीएस 80 से 160 तक रहता है, जबकि डीप ट्यूबवेल का पानी 450 से 600 तक पहुंच रहा है। 500 से अधिक टीडीएस का पानी सेहत के लिए हानिकारक होता है। पानी का पीएच मानक 6.5 से 8.5 होना चाहिए, लेकिन सप्लाई में यह इससे ज्यादा आ रहा है। बरोदा ठुठान के सुरेंद्र खासा का कहना है कि इस पानी से बच्चों और बुजुर्गों की सेहत खराब हो रही है। पेट दर्द, चर्म रोग और बाल झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। गांव के लोगों ने विभाग से जल्द डिग्गी ठीक करने, टूटी पाइपलाइन बदलने और नियमित नहरी पानी की सप्लाई देने की मांग की है, ताकि लोगों को राहत मिल सके। गांव में पीने के पानी की सप्लाई बहुत खराब है। विभाग ने डिग्गी को जर्जर घोषित कर उसका उपयोग बंद कर दिया है। अब गांव में पानी का सही प्रेशर नहीं आ रहा। स्टोरेज ना होने के कारण नहरी पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। डीप ट्यूबवेल का पानी अच्छा नहीं है।