दो फर्जी फर्म के नाम से म्यूल खाते खुलवाकर 52 करोड़ की साइबर ठगी मामले में बैंक अधिकारी भी संलिप्त हैं। साइबर पुलिस की प्रथम दृष्टया में यह सामने आया है। पुलिस अब अधिकारियों की भी जांच कर रही है। अब तक की जांच में एक और खुलासा हुआ है। सोनीपत के गन्नौर निवासी प्रमोद और धर्मेंद्र और दिल्ली के पटेल नगर निवासी निशांत और लेबर चौक करोल बाग निवासी सन्नी ने फर्जी फर्म बनवा खाते खुलवाए थे। म्यूल खातों का प्रयोग कर अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी की अलग-अलग 110 से अधिक वारदातों में प्रयोग किया गया है। इनमें से पांच वारदात हरियाणा राज्य की भी शामिल हैं। बैंक खाता खुलवाने के लिए साइबर ठगों ने एक किरायानामा तैयार कराया था। उसी के आधार पर बिना किसी तस्दीक के चालू खाते खोल दिए गए थे। हरियाणा साइबर क्राइम पुलिस को प्रदेश की 91 बैंक शाखाओं में संदिग्ध खाते मिले थे। जिनमें 11 खाते पानीपत की बैंक ऑफ इंडिया की जीटी रोड शाखा में खोले थे। इसके बाद से ही साइबर क्राइम थाना पुलिस प्रकरण की जांच में जुटी है। जिसमें नए-नए खुलासे हो रहे हैं। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दोनों खातों की जांच की की है। बैंक के अधिकारियों ने खातों की विजिट रिपोर्ट, खाता खोलने के लिए जारी किए गए वेलकम लेटर नहीं दिखाए। बाकी डिटेल के आधार पर जांच की तो पता चला कि खाता खुलवाने के लिए आरोपियों ने फर्जी फर्म के नाम पर किरायानामा तैयार कराया था। लेकिन, जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां पर कोई फर्म नहीं मिली। भवन के मालिक से बात की तो उन्होंने किरायानामा की कॉपी पुलिस को दी है। जिसके बाद पुलिस ने कॉपी को भी अपने कब्जे में ले लिया है। खाता खोलने वाले बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी पुलिस की जांच की जद में आ गए हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी।