नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र के गांव लुजोता में प्रस्तावित उपमंडल कार्यालय निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीणों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी और उपजाऊ जमीन को बिना उचित मुआवजे के जबरन अधिग्रहित किया जा रहा है, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से उनके परिवारों के पास है और खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। ग्राम पंचायत लुजोता के सरपंच प्रतिनिधि सतवीर ने बताया कि गांव की कुल 204 किला जमीन में से 150 किला जमीन पहले ही लोगों को मिल चुकी है, लेकिन 54 किला जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है। उनका आरोप है कि सरकार इस जमीन पर लघु सचिवालय, कोर्ट और रेस्ट हाउस बनाने के लिए दबाव बना रही है, जबकि यह जमीन करीब 14 परिवारों की पुश्तैनी संपत्ति है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार किसी प्रकार का मुआवजा देने से भी इनकार कर रही है। ग्रामीण बंशी नंबरदार ने बताया कि वर्ष 1987 में सरकार ने इस जमीन को किसानों को देने का फैसला किया था। उस दौरान 85 लोगों को जमीन मिल गई, लेकिन 14 परिवार इससे वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है और डीसी व एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है। ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाए और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाए। वहीं पूरे मामले को लेकर डीआरओ राकेश कुमार ने कहा कि ग्रामीणों की मांग को उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है। कानून के आधार पर जो भी उचित कार्रवाई होगी, उसे अमल में लाया जाएगा और ग्रामीणों को अवगत करा दिया जाएगा।