जनगणना एक दर्पण की तरह है, जो हमें बताती है कि हम आज कहां खड़े हैं और हमें कल कहां पहुंचना है। इसके बिना विकास की कोई भी योजना अंधेरे में तीर चलाने जैसी होगी। ऐसे में देश के इस सबसे महत्वपूर्ण कार्य को सभी अधिकारी पूरी सटीकता के साथ करें। यह निर्देश नगराधीश डॉ. मंगलसेन ने मंगलवार को लघु सचिवालय में जनगणना को लेकर हुई अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिए। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए जनगणना के नियमों की जानकारी दी गई। बैठक के दौरान उन्होंने बताया कि आगामी जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न की जाएगी, जिसमें पहले चरण के तहत मकानों की सूची तैयार करने और आवास गणना का कार्य अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच संभावित है। दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक मुख्य जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य की सफलता के लिए प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 2100 प्रगणक और करीब 350 पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) तैनात किए जाएंगे, जो करीब 700 से 800 की जनसंख्या वाले प्रत्येक गणना ब्लॉक में डेटा एकत्र करेंगे। उन्होंने बताया कि जनगणना का डेटा ग्रामीण स्तर पर गांव वार और शहरी स्तर पर वार्ड वार प्रकाशित किया जाएगा। जिसमें सभी पंचायतों, ढाणियों और मजरा क्षेत्रों को संबंधित राजस्व गांवों में ही शामिल किया जाएगा, ताकि डेटा की सटीकता बनी रहे। उन्होंने बताया कि प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को दोनों चरणों के सफल समापन के बाद कुल 25,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा, जो सीधे उनके खातों में हस्तांतरित होगा।