युवतियों व महिलाओं को खाने में पोषण का विशेष ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो भविष्य में उनको को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर महिलाओं के स्वास्थ्य व परिवार पड़ता है। पर पड़ता। ये बातें मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शहर स्थित राजकीय महिला आईटीआई में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में कही। इसमें संस्थान की 60 छात्राएं शामिल हुई। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से न्यूट्रीशन एंड बायोलॉजी डिपार्टमेंट हैड डॉ. अनीता कुमारी, कृषि विज्ञान केंद्र से जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. पूनम यादव और फैमिली कोर्ट नारनौल से जनरल काउंसलर पिंकी यादव ने शिरकत की। सभी ने पोषण की कमी से युवतियों को दैनिक जीवन और गृहस्थ जीवन में आने वाली समस्याओं से रूबरू कराया और इसके निदान के उपाय बताए। इस दौरान आईटीआई इंचार्ज हर्षवर्धन व महिला अनुदेशक सुमित्रा कुमारी भी मौजूद रहे। पीरियड महिलाओं व युवतियों की सबसे बड़ी समस्या है और इसके चलते महिलाओं को काफी संख्या रक्त का नुकसान उठाना पड़ता है। रक्त की कमी के कारण महिलाओं में बड़ी समस्या एनीमिया की रहती है। इस अवधि में युवतियों व महिलाओं को डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासकर 13 से 18 साल की अवधि में पोषण की कमी होने पर युवतियों का संपूर्ण विकास प्रभावित होता है और इससे उनमें खून पूर्ति भी नहीं हो पाती है। उनका हमेशा काम में मन नहीं लगता, थकान, कमजोरी, एकाग्रता की कमी व चिड़चिड़ा स्वभाव होता है। ठीक से बात भी नहीं कर पाती हैं। इसलिए हमेशा अपनी डाइट में पालक, बथुआ, मशरूम व हरी सब्जियां व फल और मोटे अनाज का प्रयोग करना चाहिए। इससे उनमें आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति रहेगी। साथ ही महिलाएं रक्त बढ़ाने व विटामिन सी का जरूर ध्यान रखें। इनसे ही काम करने की ऊर्जा मिलती है।