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मेरा गांव मेरी शान: महेंद्रगढ़ में देशभक्ति की मिसाल पेश कर रहा पाली, हर घर में दो से तीन सैनिक

सैनिकों की बात आते ही पाली गांव का नाम सबसे पहले लिया जाता है। पाली एक ऐसे वीर की भूमि है जिन्होंने युद्ध में वीरगति प्राप्त की और जिला में सबसे पहले शहीद का दर्जा पाया। इसके बाद सरकार की ओर से उनको अशोक चक्र प्रदान किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हर घर में दो से तीन सैनिक हैं और सभी में पीढ़ी दर पीढ़ी सैनिक बनने की परंपरा कायम है। वर्तमान में गांव के 500 से अधिक सैनिक देश के विभिन्न स्थानों पर देशसेवा कर रहे हैं जबकि 1,500 सैनिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। खास बात ये है कि गांव के तीन सैनिक शहीद हुए हैं और तीनों ही युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। इसमें सबसे पहले सिपाही हुकमसिंह तंवर ने सन 1961 में गोवा ऑपरेशन के दौरान सैनिकों की जान बचाने के लिए यहूदियों की सैंकड़ों गोलियां सीने खाई और गोली लगने बाद भी दुश्मनों पर पलटवार कर बदला लिया। इसी दौरान उन्होंने भारत के लिए अपनी सांसें अमर कर दी और पाली का नाम भी जिला मशहूर हो गया। शहादत के बाद उनकी माता सजना देवी को वीर जवान के अदम्य साहस के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अशोक चक्र सम्मान प्रदान किया। इसी तरह अलबाद सिंह चीन युद्ध के दौरान वाहन चलाते हुए शहीद हुए। वहीं, मनोहर सिंह ने पाकिस्तान के साथ हुए 1965 के युद्ध में शहादत प्राप्त की। इनके अलावा गांव निवासी तत्कालीन समय में राष्ट्रपति के एडीसी रहे कैप्टन भंवर सिंह को भी सेना मेडल प्राप्त है। संगठन बनाकर कर रहे समाजसेवा: पूर्व सैनिकों की ओर से पाली समेत 20 गांवों के सैनिकों को मिलाकर बीजेआरडी पूर्व सैनिक वेलफेयर संगठन बनाया गया है। इसमें सभी सैनिक समाजसेवा का कार्य करते हैं। बाबा जयरामदास मेले के दौरान सुरक्षा का जिम्मा पूर्व सैनिकों को सौंपा जाता है। साथ ही गांव में अनुशासन, युवाओं का उत्साहवर्धन करना व भाईचारा बनाए रखने की परंपरा को पूर्व सैनिक बनाए हुए हैं। शहीदों के सम्मान बनेगा स्मारक गांव के मुख्य रोड पर शहीद हुक्मसिंह के नाम पर शहीद स्मारक बनाया गया जाएगा। सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह ने इसके लिए 21 लाख रुपये का बजट दिलाया है जबकि विधायक कंवर सिंह ने चहारदीवारी का जिम्मा लिया है। फिलहाल स्मारक का निर्माण शुरू हो चुका है और आगामी चार माह में स्मारक बनने की उम्मीद है। सैनिक बोले: शहीदों की भूमि का दर्जा मिलना हमारे लिए गौरव की बात: हमारे घर में तीन पीढ़ी से सैनिक जन्म लेते आ रहे हैं और फिलहाल 50 सैनिक सेवारत्त हैं। सेवा के दौरान वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लैफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को एनडीए की ट्रैनिंग दी थी। साथ ही 13 देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है। - कृष्ण सिंह शेखावत, सूबेदार मेजर। गांव में नौजवान सैनिक से लेकर कैप्टन पद तक गए हैं। फिलहाल गांव के प्रदीप शर्मा कर्नल पद पर हैं जबकि विरेंद्र सिंह व कृष्ण कुमार मेहता कर्नल पद से सेवानिवृत्त हैं। इनके अलावा गांव निवासी कुंदनलाल शर्मा नेवी जज एडवोकेट हर चुके हैं। फिलहाल 10 युवक सेना में क्लर्क और 4 टेक्निशियन पद पर भर्ती हुए हैं। - महिपाल सिंह, पूर्व सैनिक। हमारा गांव संत और वीरों का गांव हैं। सैनिकों ने सर्जिकल स्ट्राइक, प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध, कारगिल, ऑपरेशन एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, 1948, 1962, 1971 के युद्ध में भी भाग लिया है। अपने पूर्वजों के पदचिह्नों पर चलकर हम अपने देश को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दे रहे हैं। - विक्रम सिंह, कैप्टन। गांव के युवा अपने पूर्वजों से प्रेरित हैं और देशसेवा करने की निष्ठा ही उन्हें सेना में भर्ती कर रही है। इसी माह गांव के 14 युवा सेना में भर्ती हुए हैं। पाली गांव में बनी अकादमियों में हरियाणा के साथ राजस्थान के युवा भी प्रशिक्षण ले रहे हैं और देशसेवा का मौका पा रहे हैं। -प्रीतम तंवर, युवा प्रशिक्षक।

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