श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्ववंश न्यौछावर कर दिया। इस बलिदान और त्याग को हमेशा अपने जहन में याद रखने की जरूरत है। समाज के नागरिकों को श्री गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों, शिक्षाओं और वाणी को अपने जीवन में धारण करने की जरूरत है ये विचार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को गांव बीड मथाना में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व पर श्री गुरुद्वारा सिंह सभा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने गांव बीड मथाना के प्रवेश पर श्री गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बनाए गए श्री गुरु तेग बहादुर द्वार का उद्घाटन रिबन काटकर किया। इसके उपरांत श्री गुरुद्वारा सिंह सभा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को माथा टेककर प्रदेशवासियों की खुशहाली के लिए अरदास की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को 11 लाख रुपए की अनुदान राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने प्रदेशवासियों को प्रकाश पर्व की बधाई दी और कहा कि पूरे विश्व में गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्ववंश वार दिया। आज हिंद की चादर गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं, आदर्शों को अपने जीवन में धारण करने की जरूरत है। इस पर्व पर बीड मथाना में श्री गुरु तेग बहादुर जी की यादों को हमेशा तरो ताजा रखने के लिए प्रवेश द्वार का निर्माण किया गया है। इसी मार्ग से होते हुए लौहगढ़ पहुंचे थे। इस प्रकाश पर्व पर भाजपा के जिला अध्यक्ष तजेंद्र सिंह गोल्डी, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुभाष कलसाना सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। गुरुओं की वाणी और इतिहास का संरक्षित कर रही सरकार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने गुरु तेग बहादुर के साथ-साथ सभी गुरुओं की वाणी और इतिहास को संजोने के लिए कुरुक्षेत्र में भव्य और सुंदर संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। पानीपत की धरा पर गुरु तेग बहादुर का 400 साला प्रकाश पर्व मनाया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लाल किला नई दिल्ली पर प्रकाश पर्व मनाया था। यह सरकार गुरुओं की वाणी और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सिरसा में जहां गुरु नानक देव जी महाराज जी ने 40 दिन रहकर तपस्या की और समाज को शिक्षाएं दी, उसी जगह चिल्ला साहिब गुरुद्वारा साहिब के नाम बिना पैसे के सारी जमीन नाम करवाने का काम किया, बाबा बंदा सिंह बहादुर के नाम पर कुरुक्षेत्र में द्वार का निर्माण किया और बकायदा मार्ग का नाम भी बाबा बंदा सिंह बहादुर के नाम से रखा गया।