हमें अपने जीवन का उद्देश्य समझना चाहिए और उसी अनुसार ही जीवन जीना चाहिए। जन्म लिया और मृत्यु हो जाना, यह जीवन नहीं बल्कि धरा पर भार ही माना जाता है। ये विचार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने व्यक्त किए। मंगलवार को महिला महाविद्यालय में राज्य स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ, उच्चतर शिक्षा विभाग के सौजन्य से राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की ईकाई एक एवं दो के संयुक्त तत्त्वावधान में यूथ फाॅर माय भारत-डिजिटल लिटरेसी विषय पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने सफल जीवन का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि जो अपने कुल के गौरव को बढ़ाते हैं, माता-पिता का नाम रोशन करते हैं, जो दुनिया में इज्जत कमाते हैं वहीं लोग ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसा प्राणी नहीं है, जो जन्म के बाद मृत्यु को नहीं प्राप्त करते हैं। लेकिन हमारे महापुरुष धन्य है, जो जन्म एवं मृत्यु के बीच के जीवन काल को मानव की भलाई में लगाते हैं। दीन दुखियों की सेवा में लगाते हैं और फिर उनका नाम सदैव के लिए हर किसी की जुबां पर भी रहता है।