सरकार उनकी फसल को समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीद प्रणाली और अधिक पारदर्शी हो, इसके लिए ही कईं नई पहल शुरू की है। इनका अभी से ही किसानों को फायदा दिखाई देने लगेगा। फसल नुकसान एवं भरपाई के लिए कुरुक्षेत्र, हिसार, सिरसा व फतेहाबाद में किसानों के लिए पोर्टल खोल दिया है। कुरुक्षेत्र के छह गांव, फतेहाबाद के नौ, हिसार के 10 गांव तथा सिरसा के दो गांव शामिल हैं। यह कहना है मुख्यमंत्री नायब सैनी का। उन्होंने शनिवार को बाबैन अनाज मंडी का दौरा कर गेहूं की खरीद व्यवस्था का जायजा लिया और फसल की गुणवत्ता एवं नमी की स्वयं जांच की। मंडी की सफाई व्यवस्था, फसल उठान और अन्य प्रबंधों का भी जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अपने सामने गेहूं बेचने वाले हमीदपुर निवासी किसान धर्मचंद को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने किसानों और व्यापारियों से उनकी समस्याएं जानी तो वहीं किसानों नेबताया कि इस बार गेहूं की आवक संतोषजनक है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। गेहूं की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा किसानों को भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक दिक्कत का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए सरकार संकल्पबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडी में पेयजल, छाया और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि दूर-दराज से आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान हित में निरंतर कार्य कर रही है और मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। खरीद प्रक्रिया और पारदर्शी हो, इसके लिए सरकार कईं कदम उठा रही है। इस अवसर पर बाल कल्याण परिषद की सुमन सैनी, मंडी प्रधान जगदीश ढींगरा, सरपंच संजीव सिंगला गोल्डी, मार्किट कमेटी चैयरमेन जसविंद्र जस्सी, सचिव गुरमीत सैनी, डिंपल सैनी, विनोद सिंगला, सतबीर मंगोली, कृष्ण गोयल, आदित्य दहिया सहित किसान एवं व्यापारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। वाहन की फोटो के आधार पर भी गेट पास की दी अनुमति मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीद प्रक्रिया में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीन नामांकित व्यक्तियों को भी बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि मंडियों में जवाबदेही बढ़ाने के लिए एंट्री गेट पास जारी करते समय वाहन नंबर और वाहन/लोड की फोटो दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बहुत पुराने या नए वाहनों के मामलों में, जहां वाहन नंबर उपलब्ध नहीं होता, वहां केवल वाहन की फोटो के आधार पर भी गेट पास जारी करने की अनुमति दी गई है।