कभी नवाबों की रियासत रहा कुंजपुरा आज अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक विकास की नई इबारत लिख रहा है। यमुना तट पर बसा यह कस्बा न केवल हरियाणा को उत्तर प्रदेश से जोड़ता है, बल्कि हस्तकला, शिक्षा और व्यापार के केंद्र के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। कुंजपुरा की स्थापना वर्ष 1729 में नवाब नजबत खान ने की थी। बाद में नवाब इब्राहिम अली खां यहां के प्रमुख शासक रहे। कहा जाता है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में कुंज (पक्षी) बसेरा करते थे, जिसके चलते इसका नाम कुंजपुरा पड़ा। नवाबी दौर की छाप आज भी यहां की संस्कृति और पुरानी इमारतों में साफ दिखाई देती है। समय के साथ यह गांव धीरे-धीरे कस्बे में तब्दील हो गया और अब नगर पालिका बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। बढ़ती आबादी, बाजारों का विस्तार और आधारभूत सुविधाओं में सुधार इसकी बदलती तस्वीर को दर्शाते हैं। कुंजपुरा की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने में सैनिक स्कूल कुंजपुरा का बड़ा योगदान है। महाराष्ट्र के सतारा के बाद देश का दूसरा सैनिक स्कूल यहीं स्थापित हुआ, जिसने हजारों युवाओं को सेना में जाने का सपना साकार करने का अवसर दिया। हस्तकला के क्षेत्र में भी कुंजपुरा का नाम खास है। यहां के कारीगरों की कला दूर-दूर तक पसंद की जाती है। इसके अलावा कस्बे की अनाज मंडी और बाजार आसपास के करीब 30 गांवों के लिए आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिल रहा है। यमुना के किनारे स्थित होने के कारण यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क का प्रमुख मार्ग है, जिससे व्यापार और आवागमन को बढ़ावा मिला है। इतिहास, शिक्षा, व्यापार और संस्कृति का संगम बना कुंजपुरा आज तेजी से विकास की राह पर अग्रसर है। नगरपालिका का दर्जा मिलने के बाद यहां बुनियादी सुविधाओं में और सुधार की उम्मीद है, जो इसे आने वाले समय में और सशक्त बनाएगा।