बिजली निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (एसई) गीतू राम तंवर की मौत के मामले में परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतक के भाई सुरेश तंवर ने कहा कि जब तक सुसाइड नोट में जिन-जिन अधिकारियों के नाम हैं, उन्हें आरोपी बनाकर गिरफ्तार नहीं किया जाता और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार शव का अंतिम संस्कार नहीं करेगा। वहीं परिवार की ओर से अधिवक्ता सोनिया तंवर ने आरोप लगाया कि पुलिस को दी गई शिकायत में 12 अधिकारियों के नाम स्पष्ट तौर पर दिए गए थे, लेकिन पुलिस ने एफआईआर में इन सभी को अज्ञात दिखा दिया। सुरेश तंवर ने कहा कि उनके भाई ने अधिकारियों के खिलाफ पहले भी शिकायतें की थीं। उन्होंने आईजी सोनीपत और ईडी को भी शिकायत दी थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। अब सुसाइड नोट सामने आने के बाद परिवार की मांग है कि उसमें जिन अधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया गया है, उन्हें मामले में आरोपी बनाया जाए और गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सुसाइड नोट में शामिल एक-एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार शव नहीं उठाएगा। सुरेश तंवर ने कहा कि परिवार किसी अधिकारी को बचाने की कोशिश स्वीकार नहीं करेगा और इस मामले में निष्पक्ष जांच चाहता है।