इंसान की मौत पर उसके अंतिम संस्कार में लोगों की भीड़ देखी होगी, लेकिन बिरड़ गांव में नंदी (सांड) की मृत्यु पर पूरा गांव एकत्रित हुआ और भावपूर्ण ढंग से नंदी का अंतिम संस्कार किया गया। वीरवार सुबह गांव के एक बुजुर्ग नंदी (सांड) का निधन हो गया। नंदी को गायों के संवर्धन कार्य के लिए गांव में रखा गया था और वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे ग्रामवासियों ने एकजुट होकर बड़े आदर के साथ अंतिम विदाई दी। परिवार में जैसे एक बुजुर्ग की मृत्यु होने पर को ढोल बजाकर और गुब्बारों से सजी अर्थी पर ले जाया जाता है, वैसे ही बुजुर्ग नंदी को जिस ट्रैक्टर पर ले जाया गया, उसको फूल-मालाओं के साथ गुब्बारों से सजाया गया था। तेजपाल महाराज, वजीर दास ने बताया कि हिंदू धर्म में गाय को माता के समान पवित्र माना जाता है, जो जीवनदायिनी, कृषि और धार्मिक अनुष्ठानों का आधार है। नंदी (सांड) भगवान शिव की सवारी के रूप में पूजा जाता है, जो धर्म, शक्ति और आस्था का प्रतीक है, इसलिए उनका अंतिम संस्कार हिंदू आस्था, नंदी पूजा और ग्रामीण परंपरा का अटूट हिस्सा है। सुबह ही ग्रामीणों ने विधिवत व्यवस्था की और मंत्रोच्चार के बीच नंदी के पार्थिव शरीर को पूर्ण सम्मान के साथ दाह संस्कार किया। सैकड़ों ग्रामीण इस भावपूर्ण विदाई में शामिल हुए। सर्वे संतु निरामया : सर्वे भद्राणि पश्यन्तु इस प्राचीन मंत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने सभी प्राणियों की रक्षा और संवर्धन के लिए मंगल कामना की। यह घटना ग्रामीण भारत की पशु प्रेम, गौ-नंदी संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है। इस अवसर पर लालचंद, सूरत सिंहब, रामौतार, अमीर सिंह, किशोर सिंह, पप्पू, बबलू, रतिराम और वीरेंद्र सिंह मौजूद रहे।