कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट और हरियाणा लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया को लेकर युवाओं ने सोमवार को देश की बात फाउंडेशन की तरफ से शहर में रोजगार अधिकार यात्रा निकाली। युवाओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है और सीईटी के नॉर्मलाइजेशन के नाम पर योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है। सभी युवा महर्षि दयानंद स्टेडियम में एकत्रित हुए और यहां से शहर में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञाप सौंपा। सिलानी निवासी नीरज ने कहा कि एचपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में 613 पदों के मुकाबले इंटरव्यू के लिए केवल 151 अभ्यर्थियों का चयन किया गया जबकि 75 प्रतिशत से अधिक पद खाली छोड़ दिए गए। आरोप है कि 2200 से अधिक उम्मीदवारों में से 35 प्रतिशत अंक भी बहुत कम अभ्यर्थी ही हासिल कर पाए, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। युवाओं का कहना था कि नेट-जेआरएफ, गोल्ड मेडलिस्ट और पीएचडी स्कॉलर जैसे योग्य उम्मीदवार भी चयन से बाहर हो रहे हैं। उनका दावा है कि यह योग्यता की हार नहीं बल्कि सिस्टम की खामी है। उनका आरोप था कि न तो नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला सार्वजनिक किया गया है और न ही उम्मीदवारों को आनर शीट उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न युवाओं ने उठाए हैं। युवाओं की मांग है कि सीईटी नॉर्मलाइजेशन की स्वतंत्र जांच, एचपीएससी की न्यायिक जांच, सभी खाली पदों को शीघ्र भरने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार नीति बनाई जाए। रोजगार अधिकार यात्रा के दौरान युवाओं ने मांग उठाई है कि 2024 से स्कॉलरशिप भी बंद है, उसे शुरू किया जाए। युवाओं ने यात्रा के दौरान प्राइवेट बसों में भी छात्र छात्राओं के पास को मान्य करने की मांग उठाई। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।