श्री दुर्गा भवन मंदिर के प्रांगण में कार्तिक मास शुक्ल पक्ष एकादशी को सामूहिक तुलसी विवाह बड़े धूमधाम से आयोजित किया गया। इसमें काफी संख्या में लोगों ने भाग लेते हुए धूमधाम से विवाह मनाया। तुलसी शालिग्राम विवाह के मौके पर श्री दुर्गा मंदिर परिसर और मेन गली को लाइटों से सजाया गया। मान्यता है कि तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे का शालिग्राम से समारोह सनातन धर्म के अनुसार विवाह कराया जाता है। शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। तुलसी विवाह को लोग उसी प्रकार कराते हैं। जैसे आम लोगों के विवाह होते हैं। तुलसी विवाह को कन्यादान के बराबर माना जाता हैं। श्री दुर्गा मंदिर सेवा समिति के प्रधान इंद्र जुनेजा ने बताया कि आयोजित कार्यक्रम में अमित तनेजा परिवार ने कन्या दान की रस्म निभाई। कन्या दान रस्म से पूर्व तुलसी विवाह को लेकर बारात निकाली गई और पंडित मनमोहन मीनू शर्मा ने पूरे विधिपूर्वक तुलसी विवाह संपन्न कराया। मीनू शर्मा ने कहा कि शास्त्रों में तुलसी विवाह का आयोजन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप के साथ तुलसी का विवाह करने की परंपरा है। इस अवसर पर समिति के उमेश नंदवानी ने कहा कि हमे धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए और सभी लोगों ने जिस तरह से मिल-जुलकर सामूहिक तुलसी विवाह समारोह में भाग लिया है, वह सराहनीय है। तुलसी विवाह के उपलक्ष्य में विवाह शोभा यात्रा निकली गई, डायमंड चौक से होते हुए श्री दुर्गा भवन मंदिर पहुंची। वर पक्ष की ओर से रवि शर्मा व वधू पक्ष की ओर से अमित तनेजा परिवार ने रस्म निभाई। तुलसी विवाह समारोह का आमंत्रित श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन में नाच गाकर खूब आनंद लिया। आरती के बाद भगवान का भोग लगाकर प्रसाद स्वरूप सभी को भोजन कराया गया। विवाह रस्म अदायगी के उपरांत माता तुलसी की डोली जाने से विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान भंंडारे का आयोजन किया गया।