शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव सातरोड कलां का इतिहास काफी पुराना और गौरवपूर्ण रहा है। करीब 470 वर्ष पूर्व राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गांव झांसल से आए छादा रख्खाराम पूनिया और छन्नाराम पूनिया ने यह गांव बसाया था। दादा रख्खाराम के नाम पर रख्खापाना और छन्नाराम के नाम पर छानपाना नाम पड़ा। गांव के सात खेड़े बनाए गए थे जिस कारण से गांव का नाम सातरोड पड़ा। सातरोड कलां के सरपंच प्रदीप पूनिया के मुताबिक गांव की आबादी करीब 25 हजार है और गांव में मतदाताओं की संख्या करीब 7500 हैं। वर्ष 1955 में साधुराम गांव के सबसे पहले सरपंच चुने गए थे। गांव के लोगों की आय का मुख्य साधन खेती है। गांव में करीब 2200 एकड़ जमीन पर खेती की जाती है। गांव में एक प्राचीन शिवालय है। ग्रामीणों के अनुसार यह शिवालय 250 से 300 साल पुराना है। शिवालय पर शिवरात्रि के दिन भंडारे का आयोजन किया जाता है। गांव में हनुमान का भी मंदिर है जिसका निर्माण करीब 50 साल पहले किया गया था। नवंबर और मार्च में मंदिर में मेले का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा गांव में बाबा मस्तनाथ मंदिर और बाबा लाडूनाथ का मंदिर भी है। बाबा लाडूनाथ के मंदिर में चैत्र और आश्विन माह की दसवीं को मेला लगता है। गांव में चार तालाब है जिनमें डोभी, डोभा, भ्याने और ब्राह्मण तालाब शामिल है। पुराने समय में डोभा तालाब के पानी को ग्रामीण पीने के लिए इस्तेमाल में लाते थे। आज भी गांव में ये चारों तालाब मौजूद हैं। हालांकि इन तालाबों पर अब अतिक्रमण हो रखा है।