हांसी। हांसी जिले के भकलाना गांव की बेटी तनु शर्मा ने स्लोवाकिया में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 72 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है। तनु ने चैंपियनशिप में भारत को पहला पदक दिलाया। उनकी इस उपलब्धि के बाद भकलाना गांव सहित पूरे हांसी क्षेत्र में खुशी की लहर है। यह तनु का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक है। इससे पहले वह नेशनल स्तर पर पांच पदक अपने नाम कर चुकी हैं। खेलो इंडिया में भी तनु ने पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। मैडल विजेता बेटी की एक दिलचस्प बात भी साझा की। पिता ने बताया कि नेशनल स्तर पर पदक जीतने के बाद भी उन्होंने तनु का कोई बड़ा स्वागत नहीं करवाया था। तनु उनसे कहती थी कि जब विदेश से जीतकर लौटूंगी और जहाज का सफर तय करके आऊंगी, तब मेरा स्वागत करना। अब विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद तनु ने फोन पर पिता से कहा कि पापा अब मैं जहाज में बैठकर आऊंगी, मेरा स्वागत करना। इसलिए 23 अगस्त को बेटी आ रही है। उनकी तैयारियों के लिए हम लग गए है। तनु के पिता वीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उनकी बेटी को बचपन से ही खेलों में विशेष रुचि थी। कुश्ती के प्रति उसकी प्रतिभा को देखते हुए चाचा और भारतीय सेना से सेवानिवृत्त नरेंद्र शर्मा ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सातवीं कक्षा से तनु ने कोच संजय सिहाग के मार्गदर्शन में कुश्ती का प्रशिक्षण शुरू किया। वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि तनु ने करीब 10 साल तक लगातार कड़ी मेहनत की है। वह कभी एक दिन भी मैदान से दूर नहीं रही। बचपन में ही वह पेड़ों पर चढ़ जाती थी और शुरू से ही उसके अंदर खेलों को लेकर जुनून दिखाई देता था। उन्होंने कहा कि आज बेटी की मेहनत का फल देखकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। कुश्ती के शुरुआती प्रशिक्षण के बाद हिसार स्पोर्ट्स सेंटर के कोच सुनील ढुल और राजेश नांदल ने भी तनु की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नियमित अभ्यास, अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर तनु ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी तिरंगा लहरा दिया। तनु की मां सुमन लता ने कहा कि बेटी की उपलब्धि से उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की मिट्टी और यहां के दूध-दही से पहलवान तैयार होते हैं। बेटी ने जिस तरह मेहनत की है, उस पर पूरे परिवार को गर्व है। तनु के पिता वीरेंद्र शास्त्री सरकारी विद्यालय में संस्कृत अध्यापक हैं, जबकि मां सुमन लता गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा तनु का हौसला बढ़ाया और उसकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया। तनु के दादा मंगत राम शर्मा ने भी खुशी जताते हुए कहा कि उनकी पोती ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तनु भविष्य में और बड़े मुकाबले जीतेगी और ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर तनु शर्मा ने साबित कर दिया है कि छोटे गांवों की बेटियां भी अपनी मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के दम पर विश्व मंच पर देश का परचम लहरा सकती हैं।