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हिसार: सिंगापुर से लाई गई मशीन तथा आस्ट्रेलिया से लाए गए मेटेरियल से 50 साल बढ़ेगी सीवरेज लाइन की क्षमता

शहर की 40 साल पुरानी ईंटों से बनीं सीवर लाइनों के अंदर सीआईपीपी तकनीक से सीवर लाइनों की मजबूती 50 साल तक बढ़ाई जा रही है। सिंगापुर से लाई गई मशीन तथा आस्ट्रेलिया से लाए गए मेटेरियल से पुरानी लाइनों के अंदर नई लाइन बनाई जा रही है। शहर में काफी जगह ईंटों से बनी सीवर लाइन हैं। लाइन बनाने में इस तकनीक का इस्तेमाल काफी साल पहले किया जाता था। पुरानी होने के कारण ये लाइनें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। अधिकारियों ने इन लाइनों की जगह नई लाइन डालने के बजाय इनकी मरम्मत करवाना उचित समझा। चूंकि इनकी मरम्मत पर काफी बजट लगता तो इस प्रोजेक्ट को अमृत टू योजना में शामिल किया था। इस योजना के तहत शहर के लिए कुल 236 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है। इन लाइनों की मरम्मत होगी अमृत टू के अंतर्गत राजगढ़ रोड पर कमिश्नर हाउस से गंगवा व आईजी चौक से कोर्ट तक, कैमरी रोड पर 33 फुटा रोड पर 4 एमएलडी एसटीपी तक, मिल गेट रोड पर मिल गेट से सिविल अस्पताल तक, डीएन कॉलेज से ऋषि नगर एसटीपी तक और पुरानी सब्जी मंडी चौक से जहाजपुल चौक तक सीवर लाइनों की मरम्मत की जाएगी। इन लाइनों की लंबाई करीब 17 किलोमीटर है। ये होती है सीआईपीपी तकनीक सीआईपीपी तकनीक का मतलब क्योर-इन-प्लेस पाइप है। यह मौजूदा पाइपों की मरम्मत के लिए एक ट्रेंचलेस (बिना खोदाई वाली) तकनीक है। इसमें एक लचीले, रेज़िन-संतृप्त लाइनर को क्षतिग्रस्त पाइप के अंदर डाला जाता है और फिर उसे पानी, भाप या यूवी प्रकाश का उपयोग करके सख्त और मजबूत कर दिया जाता है, जिससे एक नया पाइप बन जाता है। यह अक्सर कम लागत वाला विकल्प है क्योंकि इसमें खोदाई और पुनर्निर्माण की लागत नहीं आती है। यातायात, पदयात्री और संपत्ति पर कम से कम व्यवधान होता है।

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